देहरादून। उत्तराखंड के युवा विधि शोधार्थी सुशील पुरोहित ने जिज्ञासा विश्वविद्यालय, देहरादून (पूर्व में हिमगिरि जी विश्वविद्यालय) से पीएचडी (विधि) की उपाधि प्राप्त कर एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है।
उनका शोध विषय “गर्भाधान पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 (पीसीपीएनडीटी) का सामाजिक एवं विधिक विश्लेषणात्मक अध्ययन—उत्तराखण्ड राज्य के विशेष संदर्भ में” रहा। यह शोध प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, लिंगानुपात में सुधार तथा पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े सामाजिक एवं कानूनी पहलुओं का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है।

यह शोध कार्य विधि संकाय के डॉ. भूपेश कुमार के निर्देशन में पूर्ण हुआ। शोध में उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुरूप कानून के प्रभाव, चुनौतियों तथा उसके प्रभावी अनुपालन के लिए व्यावहारिक सुझाव भी प्रस्तुत किए गए हैं, जो नीति निर्माण, न्यायिक विमर्श तथा प्रशासनिक व्यवस्था के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।
इस उपलब्धि पर शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों एवं शुभचिंतकों ने सुशील पुरोहित को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। यह उपलब्धि उत्तराखंड में विधिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही है।
