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एसओपी पर उठे सवाल, विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

देहरादून। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) समेत विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जारी एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया।

ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में हाल के दिनों में सरकारी अधिकारियों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई है। ऐसे में केवल एसओपी जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को पहले अपने ही जनप्रतिनिधियों और नेताओं को नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के पक्षधर हैं, लेकिन एसओपी का इस्तेमाल लोकतांत्रिक आंदोलनों और आम जनता की आवाज को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए। साथ ही सरकार से एसओपी जारी करने के पीछे के कारणों को सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।

ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें उठाई गई हैं—पहली, सरकारी अधिकारियों पर हमलों में शामिल सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों पर सख्त कार्रवाई; दूसरी, एसओपी का दुरुपयोग रोकने की गारंटी; और तीसरी, एसओपी लागू करने की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करना।

संगठनों का कहना है कि यदि दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती और मामलों में लीपापोती जारी रहती है, तो एसओपी की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहेंगे। ज्ञापन में सरकार से पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

ज्ञापन देने वालों में विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के पदाधिकारी शामिल रहे, जिन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर जल्द ठोस कदम उठाने की अपेक्षा जताई है।