देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की गिरफ्तारी और त्रिपुरा के छात्र एंजिल चकमा की हत्या के विरोध में शुक्रवार को उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के बैनर तले विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी अपूर्वा सिंह को सौंपा। उपजिलाधिकारी ने ज्ञापन प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में राज्य सरकार ने प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिया है। उनका कहना था कि जिन वीआईपी नामों की चर्चा सामने आई, वे सत्ताधारी दल के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े बताए जाते हैं। वहीं त्रिपुरा के छात्र एंजिल चकमा की हत्या को नफरत की राजनीति और बिगड़ती कानून व्यवस्था का परिणाम बताया गया। प्रदर्शनकारियों ने देहरादून पुलिस द्वारा मामले को आपसी रंजिश बताने पर भी सवाल खड़े किए।

संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों के खिलाफ साम्प्रदायिक और जातीय हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। सोशल मीडिया पर फैल रही नफरत को भी हिंसा की बड़ी वजह बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि छात्र एंजिल चकमा और उसके छोटे भाई पर हुए हमले के दौरान लोग मूकदर्शक बने रहे, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार, सत्तापक्ष और राज्य महिला आयोग के बयानों की निंदा करते हुए मांग की कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में जांच पूरी होने तक भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन अजय कुमार और राज्य प्रभारी दुष्यंत गौतम को उनके पदों से हटाया जाए तथा उर्मिला सनावर को सुरक्षा प्रदान की जाए। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार की कथित गैर-गंभीरता के कारण निचली अदालत द्वारा दोषियों को दी गई सजा ऊपरी अदालतों में कमजोर पड़ सकती है।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि त्रिपुरा के छात्र एंजिल चकमा की मृत्यु के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, नफरत की राजनीति पर अंकुश लगाया जाए, कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए और राज्य में बाहर से आने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस मौके पर संयोजक नवनीत गुंसाई, सीपीआईएम सचिव अनन्त आकाश, संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार, प्रवक्ता चिन्तन सकलानी, पूर्व महासचिव राजकुमार जायसवाल सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
