देहरादून। आज चिन्हीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं चिन्हित होने छूटे हुऐ आन्दोलनकारियों के चिन्हित करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट ने ज्ञापन लिया तथा एक दो दिन में वार्ता करवाने के आश्वासन दिया, ज्ञातब्य है कि सरकार लगातार चिन्हीकरण की तिथि बढा रहा है किन्तु वास्तविकता यह है कि यह प्रक्रिया केवल कागजों में तक सीमित है, वास्तविक रूप में कुछ नहीं हो रहा है।

ज्ञापन सलग्न है:-
सेवा में,
जिलाधिकारी महोदय
देहरादून
विषय: छूटे हुए उत्तराखंड आंदोलनकारियों के चिन्हिकरण हेतु यथोचित मापदंड निर्धारित किए जाने तथा शासन की शिथिल नीति से व्यथित आंदोलनकारियों के सम्मानजनक समाधान हेतु अनुरोध
महोदय;
उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद की ओर से आपके ध्यान में पुनः यहां विनम्र निवेदन लेकर आ रहे हैं की उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में सक्रिय सहभागिता निभाने वाले हजारों आंदोलनकारियों को आज भी चिन्हीकरण से वंचित रखा गया है यह चिन्हीकरण ना होना न केवल उनके संघर्ष के लिए की गई अनदेखी है बल्कि शासन की स्थिल एवं उपेक्षा पूर्ण नीति का जीता जागता उदाहरण भी है।

वंचित आंदोलनकारी की व्यथा एवं समस्या के कारण:
1, रिकॉर्ड का नष्ट होना व उपलब्ध न होना_ अधिकांश मामलों में सरकारी एवं पुलिस रिकॉर्ड समय के साथ नष्ट हो गए हैं या उनका पुलिस रखरखाव न होने के कारण वे उपलब्ध नहीं है
2; आंदोलन से जुड़े हुए दस्तावेजों /कटिंग और साक्षयो का व्यवस्थित रूप से संरक्षण नहीं किया गया!
3; पिछले कई वर्षों से चिन्हीकरण की प्रक्रिया में लगातार शिथिलता बरती जा रही है जिससे सच्चे आंदोलन कारी पीड़ित है
4; केवल उन्हीं दस्तावेजों को मान्यता दी जा रही है जो सरकारी स्रोतों से हो! जबकि अधिकांश आंदोलनकारीयो के पास केवल अखबारों की कतरने, पुराने आवेदन, या वरिष्ठ आंदोलनकारी के सत्यापन ही उपलब्ध हैं
आज के प्रदर्शन की प्रमुख मांगे:
प्रारंभिक समय के मापदण्ड रखे जाएं जिनमे निम्नलिखित को मान्य किया जाए:
‘ जेल जीवन/ पुलिस डिटेंशन के प्रमाण
: आंदोलन में भागीदारी से संबंधित अखबार की कतरने!
: चिन्हितआंदोलनकारियों अथवा वरिष्ठ आंदोलनकारियों द्वारा दिया गया सत्यापन! ‘
: पुराने आवेदनों को भी मान्यता दी जाए क्योंकि उस समय आधुनिक रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं थी
चिन्हीकरण की प्रक्रिया को पुनः सक्रिय एवं पारदर्शी बनाया जाए ताकि जिन आंदोलनकारियों को पहले अनदेखा किया गया उन्हें उचित स्थान मिल सके,शासन की स्थिल नीति के कारण उत्पन्न कठिनाइयों को देखते हुए वर्षों से लंबित इस मामले का समुचित एवं सम्मानजनक समाधान निकल जाए।
इस अवसर संरक्षक बालेश बबानिया, जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार, अनन्त आकाश,रामपालसिंह,शाकुम्बरी रावत,सुभागा फर्स्वाण, नुरैशा,राजदुलारी, सीतादेवी दुर्गाध्यानी,, जगमोहनसिंह, राजेश शर्मा, विकास रावत, अमित परमार, रेख्ता शर्मा, सुमित्रा रावत, शीला जखमोला, शाकुम्भरी रावत, बिन्दा, राजेश्वरी, मोहनचन्द शर्मा, देवेश्वर काला, अजय तिवारी, पुष्पलता वैश्य, एकादशी, विमला भट्ट, अमरसिंह,नागेंद्र ममगाई, गीता नेगी,, सरिता सिलमाना आदि बडी संख्या प्रदर्शनकारी मौजूद थे।
