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छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, छह मांगें रखीं

देहरादून।  दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून में जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार और शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर छह प्रमुख मांगें उठाते हुए सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की।

मंगलवार को देहरादून स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे छात्रों एवं युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा की। प्रतिनिधियों का कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान प्रदत्त अधिकारों के विपरीत है।

ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की गई। साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग कर उसकी जगह एक स्वतंत्र और जवाबदेह वैधानिक संस्था गठित करने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लगातार परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने, घायल प्रदर्शनकारियों को समुचित इलाज और मुआवजा देने तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग भी रखी। इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को वापस लेने और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।

ज्ञापन सौंपने वालों में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से चलाया जाएगा। उन्होंने सरकार से संवाद के माध्यम से छात्रों और युवाओं की समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की।

प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध तरीके से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद रहे।