देहरादून। संयुक्त किसान मोर्चा और संयुक्त ट्रेड यूनियन कमेटी के आह्वान पर देहरादून जिले में दीनदयाल पार्क में धरना देकर राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाया गया। धरने में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर संगठनों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को छह सूत्रीय मांग पत्र भेजा। मांग पत्र में किसान विरोधी बीज (सीड) कानून 2025 को वापस लेने, श्रमिक विरोधी चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने और समाप्त किए गए 29 श्रम कानूनों को बहाल करने की मांग की गई। इसके साथ ही किसान व आम जनता विरोधी बिजली बिल 2025 को वापस लेने, वीबीजी रामजी बिल 2025 को समाप्त कर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून को बहाल करने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को एमएस स्वामीनाथन फार्मूले के तहत C2+50 प्रतिशत लागू करने की मांग रखी गई। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रति माह तय करने की भी मांग की।

इसके अलावा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक अलग ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में ऋषिकेश के बापूग्राम क्षेत्र को लेकर चिंता जताई गई, जिसे 1954 में महात्मा गांधी की शिष्या मीराबेन ने बसाया था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वर्तमान में नगर निगम ऋषिकेश के 12 वार्डों में तब्दील हो चुके इस क्षेत्र पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को मालिकाना अधिकार देने और वन विभाग द्वारा कृषि भूमि पर की जा रही तारबाड़ को रोकने के लिए उचित कार्रवाई की मांग की।
धरने में उत्तराखंड किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष शिव प्रसाद देवली, प्रांतीय महामंत्री भूपाल सिंह रावत, प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह सजवान, जिला अध्यक्ष कमरूद्दीन, जिला महामंत्री पुरुषोत्तम बडोनी, जिला कोषाध्यक्ष सुधा देवली सहित कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। वहीं ट्रेड यूनियन सीटू, एटक, आंगनवाड़ी यूनियन सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी आंदोलन में सहभागिता की और मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।
