उत्तरकाशी। सीमांत जनपद उत्तरकाशी की कठिन परिस्थितियों से निकल कर पहले पीसीएस और फिर आईएएस बनने वाले चंद्र सिंह जी का आज देहरादून में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। सीपीएम ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया तथा उनके निधन को अपूर्णीय क्षति कहा, पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनकी अन्तेष्टि कल हरिद्वार में होगी, वे ईमानदार क्षवि के जनपक्षीय अधिकारी रहे!
सीमांत जनपद के भी सीमांत गांव भौंकोली में अनुसूचित जाति परिवार में 15 अगस्त 1942 को जन्में चंद्र सिंह जी के बारे में एक दिलचस्प वाकया है। 1959 में उन्होंने हाई स्कूल किया तो सुंदरलाल बहुगुणा जी उनके घर पहुंचे और उनके पिता से कहा आपके 7 बेटे हैं, एक मुझे दे दीजिए। और फिर चंद्रसिंह जी को उनके पिता ने बहुगुणा जी के साथ भेज दिया।
बहुगुणा जी उन्हें टिहरी ले आए, प्रताप इंटर कॉलेज में 11 वीं में एडमिशन दिलाया और ठक्कर बापा छात्रावास में रहने की व्यवस्था कर दी। तब से सर्वोदय और गांधी विचार का उनके जीवन पर असर रहा। 1961 में टिहरी से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के लिए भेज दिया गया। 1967 में वे पीसीएस बन गए। फिर 1985 में उत्तर प्रदेश कैडर में ही आईएएस हो गए।
उत्तर प्रदेश और फिर उत्तराखंड राज्य बनने के बाद उन्होंने यहां विभिन्न जिलों में सेवाएं दी। एसडीएम से लेकर डीएम, आयुक्त और सचिव पदों तक पहुंचे। टिहरी में पुनर्वास निदेशक भी रहे। उनकी चर्चा सादगी और ईमानदारी के लिए भी होती रही है ….
