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छूटे आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की तिथि बढ़ाने की मांग, मुख्यमंत्री ने दिया प्रक्रिया फिर शुरू करने का आश्वासन

छूटे आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की तिथि बढ़ाने की मांग, मुख्यमंत्री ने दिया प्रक्रिया फिर शुरू करने का आश्वासन

देहरादून। उत्तराखंड आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की तिथि बढ़ाने और अब तक चिन्हीकरण से वंचित वास्तविक आंदोलनकारियों को सम्मान एवं सरकारी सुविधाओं का लाभ देने की मांग को लेकर उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। शहीद स्थल पर सौंपे गए ज्ञापन में परिषद ने कहा कि राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद बड़ी संख्या में आंदोलनकारी अभी तक चिन्हीकरण की प्रक्रिया से बाहर हैं।

परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन के लिए हजारों आंदोलनकारियों ने संघर्ष किया और अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनके लंबे आंदोलन और बलिदान के परिणामस्वरूप ही उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया। सरकार की ओर से आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया संचालित की जा रही है, लेकिन अभी भी कई वास्तविक और प्रामाणिक आंदोलनकारी इससे वंचित हैं। परिषद के मुताबिक, इससे आंदोलनकारियों और उनके परिवारों में निराशा और आक्रोश की स्थिति है।

परिषद ने रखीं ये प्रमुख मांगें

ज्ञापन के माध्यम से परिषद ने चिन्हीकरण की वर्तमान तिथि बढ़ाने की मांग की, ताकि आवेदन करने से छूट गए आंदोलनकारियों को एक और अवसर मिल सके। इसके साथ ही सभी प्रामाणिक आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर उन्हें सम्मान और सरकार की ओर से निर्धारित सुविधाओं का लाभ देने की मांग की गई।

परिषद ने चिन्हीकरण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समावेशी बनाने की मांग भी उठाई। साथ ही छूटे हुए आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के लिए विशेष शिविर आयोजित करने और आवश्यक दस्तावेज जुटाने में सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई। परिषद ने दो वरिष्ठ आंदोलनकारियों के सत्यापन को भी आधार बनाने का सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री ने दिया प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का आश्वासन

ज्ञापन सौंपने के बाद मुख्यमंत्री ने परिषद के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी, ताकि कोई भी वास्तविक आंदोलनकारी इससे वंचित न रह जाए। परिषद ने मुख्यमंत्री के आश्वासन का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि जल्द ही इस संबंध में ठोस आदेश जारी किए जाएंगे।

परिषद ने कहा कि छूटे हुए आंदोलनकारियों को न्याय और सम्मान मिलने से राज्य आंदोलन के इतिहास और उसमें दिए गए बलिदानों को उचित सम्मान मिल सकेगा।

इस अवसर पर मुजफ्फरनगर कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

धरने में संरक्षक बालेश बबानिया, अध्यक्ष सुरेश कुमार, अनंत आकाश, सचिव सीपीएम, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष लेखराज, महिला अध्यक्ष प्रमिला रावत, सुभागा फर्सवाण, राजेश शर्मा, प्रभात डंडरियाल, मंजू पंवार, गीता नेगी, रेखा शर्मा, सुरेंद्र सिंह सजवाण, चिंतन सकलानी, देवेश्वरी गुसाईं, शांति तड़ियाल, एकादशी, पुष्पा बहुगुणा, मीरा गुसाईं, अजय तिवारी, भगत सिंह रावत, जगदेश्वरी अन्थवाल, कल्पेश्वरी, सुनीता बहुगुणा, सुमित्रा रावत, नुरैशा अंसारी, गौरा देवी, शांति, पुष्पा रावत, विमला भट्ट, शाकुंभरी, विमला, शांता उनियाल, नारायण दत्त, शांति बुटोला, सतेश्वरी बहुगुणा, इंदर दत्त बहुगुणा, बिंदा मिश्रा, शीला बहुगुणा, अनिता नेगी, कुसुम नौडियाल, शशि जैन, जानकी भट्ट, यशोदा देवी सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद रहे।

ज्ञापन की एक प्रति उत्तराखंड के राज्यपाल को भी प्रेषित की गई।