देहरादून। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय उत्तराखण्ड में मंगलवार को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कैम्प 108 सेवा के यशपाल सिंह एवं सिद्धार्थ सिंह ने प्रतिभागियों को सीपीआर की तकनीक और इसके महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि आकस्मिक हृदयगति रुकने की स्थिति में त्वरित और सही ढंग से किया गया सीपीआर किसी व्यक्ति की जान बचाने में अत्यंत सहायक हो सकता है। यह एक आपातकालीन प्रक्रिया है जो हृदय और श्वास रुकने की स्थिति में दी जाती है, ताकि मस्तिष्क और हृदय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह जारी रहे। यह प्रक्रिया तब तक की जाती है जब तक आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध न हो जाए।
यशपाल सिंह ने सीपीआर की मुख्य चरणों की जानकारी देते हुए बताया कि —
सबसे पहले व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सांस की जांच करनी चाहिए।
तुरंत 108 या किसी आपातकालीन सेवा को कॉल करें।
मरीज को पीठ के बल लिटाकर उसके सीने के बीचोबीच तेज और गहरे कंप्रेशन दें — प्रति मिनट लगभग 100 से 120 बार।
30 कंप्रेशन के बाद दो रेस्क्यू ब्रीथ (मुंह से सांस) भी दी जा सकती हैं।
इस अवसर पर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य ने कहा कि सभी अधिकारी और कर्मचारी सीपीआर प्रशिक्षण अवश्य लें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें, ताकि आमजन इस जीवनरक्षक तकनीक से परिचित हो सकें।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के समस्त अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे और सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।
