गोपेश्वर। सर्वोदय केंद्र में पर्यावरण दिवस के अवसर पर चिपको नेत्री श्यामा देवी की को याद किया गया। इस अवसर पर गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्यामा देवी की पुत्रवधु मुन्नी देवी ने बताया कि जीवन भर सामाजिक सरोकारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी रही। समाज और वनों के प्रति रहे उनके विचार हमेशा हमारे प्रेरणा स्रोत रहेंगे। आज जलते जंगलोंको लेकर उनका सांगठनिक कौशल तो आज भी प्रासंगिक है,जब कहीं भी जंगल में एक छोटी सी चिनगारी उठने पर उनकी एक आवाज पर गांव की सभी महिलाएं आग बुझाने पहुँच जाती थी।उनका निधन भी आज ही के दिन हुआ था।
चिपको की मातृ संस्था दशोली ग्राम स्वराज्य मण्डल के मंत्री तथा चण्डी प्रसाद भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र के समन्वयक विनय सेमवाल ने श्यामा देवी को याद करते हुए बताया कि 60के दशक के प्रारंभ में चण्डी प्रसाद भट्ट के द्वारा गठित सर्वोदयी संस्था दशोली ग्राम स्वराज्य मण्डल के साथ जुड़ने के पश्चाद् श्यामा देवी का संपूर्ण जीवन समाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष और वनसंवर्द्धन के कार्यो में बीता।

मद्यनिषेध आंदोलन में जब सभी आंदोलनकारी गिरफ्तार हो चुके थे तो श्यामा देवी पुलिस की गिरफ्तारी से बचते हुए दिल्ली पहुंची और तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी से मुलाकात कर मद्यनिषेध को लेकर बात की। परिणामस्वरूप 90के दशक तक उत्तराखंड में पूर्ण शराब बंदी रही।
इसी तरह चिपको के प्रारंभिक दौर मण्डल और रामपुर- फाटा के चिपको आंदोलन में महिलाओं को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम में चिपको आंदोलन और मद्यनिषेध आंदोलन में सक्रिय रहे दशोली ग्राम स्वराज्य मण्डल के पूर्व मंत्री अब्बल सिंह और सामाजिक कार्यकर्ती चंद्रकला खंडूरी को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मंगला कोठियाल, सुमन भट्ट, बसंती देवी, गंगू भट्ट,सतेंद्र सिंह, सहित कई लोग मौजूद थे।
गोपेश्वर। सर्वोदय केंद्र में पर्यावरण दिवस के अवसर पर चिपको नेत्री श्यामा देवी की को याद किया गया।

इस अवसर पर गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्यामा देवी की पुत्रवधु मुन्नी देवी ने बताया कि जीवन भर सामाजिक सरोकारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी रही। समाज और वनों के प्रति रहे उनके विचार हमेशा हमारे प्रेरणा स्रोत रहेंगे। आज जलते जंगलोंको लेकर उनका सांगठनिक कौशल तो आज भी प्रासंगिक है,जब कहीं भी जंगल में एक छोटी सी चिनगारी उठने पर उनकी एक आवाज पर गांव की सभी महिलाएं आग बुझाने पहुँच जाती थी।उनका निधन भी आज ही के दिन हुआ था।
चिपको की मातृ संस्था दशोली ग्राम स्वराज्य मण्डल के मंत्री तथा चण्डी प्रसाद भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र के समन्वयक विनय सेमवाल ने श्यामा देवी को याद करते हुए बताया कि 60के दशक के प्रारंभ में चण्डी प्रसाद भट्ट के द्वारा गठित सर्वोदयी संस्था दशोली ग्राम स्वराज्य मण्डल के साथ जुड़ने के पश्चाद् श्यामा देवी का संपूर्ण जीवन समाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष और वनसंवर्द्धन के कार्यो में बीता।
मद्यनिषेध आंदोलन में जब सभी आंदोलनकारी गिरफ्तार हो चुके थे तो श्यामा देवी पुलिस की गिरफ्तारी से बचते हुए दिल्ली पहुंची और तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी से मुलाकात कर मद्यनिषेध को लेकर बात की। परिणामस्वरूप 90के दशक तक उत्तराखंड में पूर्ण शराब बंदी रही।
इसी तरह चिपको के प्रारंभिक दौर मण्डल और रामपुर- फाटा के चिपको आंदोलन में महिलाओं को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम में चिपको आंदोलन और मद्यनिषेध आंदोलन में सक्रिय रहे दशोली ग्राम स्वराज्य मण्डल के पूर्व मंत्री अब्बल सिंह और सामाजिक कार्यकर्ती चंद्रकला खंडूरी को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मंगला कोठियाल, सुमन भट्ट, बसंती देवी, गंगू भट्ट,सतेंद्र सिंह, सहित कई लोग मौजूद थे।
