देहरादून। आवासीय कॉलोनियों में बिना अनुमति संचालित व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई के बीच भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने छोटे दुकानदारों की आजीविका की रक्षा करने की मांग उठाई है। पार्टी ने बड़े होटलों, लॉज, पीजी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए गुरुवार को जिलाधिकारी देहरादून को ज्ञापन सौंपा। पार्टी का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय दुकानदारों को निशाना बनाने के बजाय नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े प्रतिष्ठानों पर सख्ती की जानी चाहिए।
छोटे दुकानदारों के नियमितीकरण की मांग
CPI(M) के जिला सचिव अनंत आकाश के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के 21 सितंबर 2026 के आदेश का हवाला देते हुए आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की गई। पार्टी ने कहा कि राशन, डेयरी, सब्जी, स्टेशनरी और छोटे घरेलू क्लीनिक जैसी सुविधाएं स्थानीय लोगों की दैनिक जरूरतों से जुड़ी हैं। इन व्यवसायों से कई गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों की आजीविका चलती है।
पार्टी ने मांग की कि छोटे दुकानदारों के खिलाफ चुनिंदा या उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए। इसके बजाय नियमों के दायरे में उनके व्यवसायों को नियमित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि उनकी रोजी-रोटी प्रभावित न हो।

बड़े होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर उठाए सवाल
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कई आवासीय कॉलोनियों में बड़े होटल, लॉज, पीजी, व्यावसायिक होमस्टे, बड़ी दुकानें और निजी अस्पताल भूमि उपयोग में आवश्यक बदलाव के बिना संचालित हो रहे हैं। पार्टी के मुताबिक, इन गतिविधियों के कारण पार्किंग की समस्या, यातायात जाम, ध्वनि और पर्यावरण प्रदूषण तथा बाहरी लोगों की अनियंत्रित आवाजाही जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
CPI(M) ने आरोप लगाया कि बड़े कारोबारियों के कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि छोटे दुकानदारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। पार्टी ने प्रशासन से सभी के लिए समान नियम लागू करने की मांग की।
छह विभागों के संयुक्त सर्वेक्षण की मांग
पार्टी ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए), पर्यटन विभाग, खाद्य विभाग, आबकारी विभाग, नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाकर आवासीय कॉलोनियों में संचालित बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सर्वेक्षण कराने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाए कि कहीं किसी प्रतिष्ठान को नियमों के विपरीत लाइसेंस, भवन मानचित्र की स्वीकृति या भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति तो नहीं दी गई है। अनियमितताएं मिलने पर संबंधित लाइसेंस निरस्त करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करने की मांग भी उठाई गई।
नियम तोड़ने वाले प्रतिष्ठानों के पंजीकरण रद्द करने की मांग
CPI(M) ने बिना वैध व्यावसायिक भूमि उपयोग परिवर्तन के संचालित बड़े होटलों, लॉज, पीजी और होमस्टे की पहचान कर उनके पर्यटन पंजीकरण, अधिभोग प्रमाणपत्र तथा खाद्य एवं आबकारी लाइसेंस निरस्त करने की मांग की। पार्टी ने यह भी कहा कि आवासीय कल्याण समितियों और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध जांच होनी चाहिए। शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई की जानकारी देना भी अनिवार्य किया जाए।
राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को भी भेजी ज्ञापन की प्रतियां
ज्ञापन की प्रतियां राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, एमडीडीए उपाध्यक्ष, नगर आयुक्त देहरादून, पर्यटन निदेशक, आबकारी आयुक्त और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी को भी भेजी गई हैं।
CPI(M) के जिला सचिव अनंत आकाश ने कहा कि आवासीय कॉलोनियों की शांति, सुरक्षा और स्थानीय निवासियों की सुविधाओं को बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके साथ गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की आजीविका की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। पार्टी ने मांग की कि कार्रवाई का मुख्य जोर नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हो और छोटे दुकानदारों को नियमानुसार राहत देते हुए उनके व्यवसायों के नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।


