जोशीमठ (ज्योतिर्मठ)। पैनखंडा जोशीमठ के भरकी गाँव में 34 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद माँ कालिका की पारंपरिक रथ यात्रा का शुभारंभ गुरुवार को ब्रह्ममुहूर्त में विधिवत रूप से हुआ। प्रातः 4 बजे मंदिर परिसर में वेद मंत्रों के साथ शक्ति संधान की प्रक्रिया आचार्य मुरारी प्रसाद सेमवाल के नेतृत्व में संपन्न हुई। इस अवसर पर अन्य विद्वान ब्राह्मणों — श्री मोहन प्रसाद सेमवाल, पं. मनोहर प्रसाद सेमवाल और श्री भुवनेश्वर प्रसाद सेमवाल — ने भी मंत्रोच्चार में भाग लिया।

देवियों का पंचायत प्रांगण में आगमन होते ही धार्मिक उल्लास के साथ रथ यात्रा से पूर्व की परंपराओं का शुभारंभ किया गया। माँ कालिका इस बार नौ माह के भ्रमण पर रहेंगी, जिसमें वह भाद्रपद संक्रांति के पश्चात श्री रुद्रनाथ मंदिर में दर्शन करेंगी और दशोली ब्लॉक के विभिन्न गाँवों का भ्रमण करेंगी। यात्रा के दौरान माता अनसूया से देव मिलन और विभिन्न ‘ध्याणीयों’ (स्थानीय देव प्रतिनिधियों) से भेंट का कार्यक्रम भी रहेगा।
इसी क्रम में माँ कालिंका जोशीमठ प्रखंड के कई गाँवों में देव भेंट करती हुई श्री बद्रीनाथ धाम, भविष्य बदरी और सिद्धपीठ लाता नंदा भगवती की यात्रा भी करेंगी। नन्दाष्टमी के पावन पर्व पर रथ गाँव में कुछ दिन के प्रवास के बाद पुनः भ्रमण पर निकलेगी।

रथ यात्रा के पुजारी गुडबीर सिंह चौहान होंगे। यात्रा से पूर्व धार्मिक अनुष्ठानों में देवरा समिति भरकी, भेटा, पिलखी, ग्वाणा और आरोसी के सदस्यगण सहित स्थानीय देवताओं के पश्वा—घंटाकर्ण-भूमियाल देवता के पश्वा लक्ष्मण सिंह नेगी, डुमक बजीर देवता, कलगोट के कॉधुड्या जाख देवता और उर्गम के घंटाकर्ण देवता—भी उपस्थित रहे।
रथ यात्रा मेला समिति ने सभी श्रद्धालुओं से माँ कालिका की इस ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा में सहभागी बनने का आग्रह किया है, ताकि वे पुण्य लाभ अर्जित कर सकें।
