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स्मार्ट मीटर को लेकर सीपीआई(एम) का विरोध, जबरन मीटर लगाने पर आंदोलन की चेतावनी

स्मार्ट मीटर को लेकर सीपीआई(एम) का विरोध, जबरन मीटर लगाने पर आंदोलन की चेतावनी

देहरादून। उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर लगाए जाने को लेकर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) ने विरोध जताया है। पार्टी ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, ऊर्जा सचिव और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के सीएमडी को ज्ञापन भेजकर स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर उपभोक्ताओं पर कथित दबाव और जबरदस्ती की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

पार्टी का कहना है कि विद्युत अधिनियम, 2003 में सही मीटरिंग की व्यवस्था है, लेकिन स्मार्ट या प्रीपेड मीटर को अनिवार्य किए जाने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ज्ञापन में धारा 47(5) का हवाला देते हुए कहा गया है कि उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर का विकल्प स्वेच्छा से चुनने का अधिकार है। पार्टी ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री द्वारा संसद में दिए गए कथित स्पष्टीकरण का भी उल्लेख किया है, जिसमें प्रीपेड स्मार्ट मीटर को उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक बताया गया था।

जबरन मीटर बदलने और शुल्क वसूली का आरोप

सीपीआई(एम) ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर UPCL के कर्मचारियों द्वारा कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदले जा रहे हैं। पार्टी के मुताबिक, कुछ उपभोक्ताओं से मीटर बदलने के नाम पर 3,000 से 5,000 रुपये तक की राशि लिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि बुजुर्ग, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के ऑनलाइन रिचार्ज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा गलत रीडिंग, अधिक बिल आने और रिचार्ज संबंधी समस्याओं की शिकायतों का भी पार्टी ने जिक्र किया है।

स्मार्ट मीटर को वैकल्पिक रखने की मांग

पार्टी ने सरकार से मांग की है कि स्मार्ट मीटर को पूरी तरह वैकल्पिक किए जाने को लेकर तत्काल स्पष्ट आदेश जारी किया जाए। साथ ही कथित तौर पर जबरदस्ती मीटर लगाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई, मीटर बदलने के नाम पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लेने और पहले से वसूली गई राशि की जांच कर उसे उपभोक्ताओं को वापस करने की मांग की गई है।

इसके अलावा बुजुर्ग, दिव्यांग और गरीब उपभोक्ताओं को विशेष छूट देने तथा शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए टोल-फ्री नंबर और जिला स्तर पर शिकायत प्रकोष्ठ स्थापित करने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई है।

धरना-प्रदर्शन के बाद आंदोलन की चेतावनी

सीपीआई(एम) के मुताबिक, उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी की ओर से धरना, जनसुनवाई और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के साथ ही ऊर्जा भवन तथा राज्य के विभिन्न विद्युत कार्यालयों में प्रदर्शन किए गए हैं।

पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर उपभोक्ताओं के साथ कथित जोर-जबरदस्ती जारी रही तो वह व्यापक आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। पार्टी ने सरकार से इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के संबंध में जानकारी देने की मांग की है।