देहरादून। वरिष्ठ सीपीएम नेता और किसान आंदोलन से लंबे समय तक जुड़े रहे कामरेड कमरुद्दीन की स्मृति में रविवार को कनाट प्लेस स्थित नारी शिल्प गर्ल्स इंटर कॉलेज के सभागार में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, किसान-मजदूर संगठनों और जनसंगठनों से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्षों और सामाजिक योगदान को याद किया।
सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धांजलि देने वालों का पहुंचना शुरू हो गया था। उपस्थित लोगों ने कामरेड कमरुद्दीन के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके जीवन से जुड़े संघर्षों को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन किसानों, खेतिहर मजदूरों, गरीबों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित किया।

किसानों को संगठित करने में अहम भूमिका
सीपीएम केंद्रीय कमेटी सदस्य डॉ. बिक्रम सिंह ने कहा कि कमरुद्दीन ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए बिताया। उन्होंने उनकी सादगी, प्रतिबद्धता और विचारों के प्रति दृढ़ता को याद किया।
सीपीएम केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में किसान संगठन को मजबूत करने में कमरुद्दीन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने गांव-गांव जाकर किसानों को संगठित करने का काम किया और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत आधार दिया।
सीपीआई(एम) उत्तराखंड के राज्य सचिव राजेंद्र पुरोहित ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के दौरान भी कमरुद्दीन ने किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सभावाला को संगठनात्मक गतिविधियों का केंद्र बनाया और युवाओं को राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया।
आंदोलनों और संघर्षों को किया याद
सीपीएम जिला सचिव शिवप्रसाद देवली ने कमरुद्दीन के आंदोलनों, जेल यात्राओं और सामाजिक संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गरीबों की जमीन से जुड़े मामलों में उन्होंने भूमाफियाओं के खिलाफ संघर्ष किया और कई मुकदमों का सामना करने के बावजूद अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटे।
सीपीआई के पूर्व राष्ट्रीय परिषद सदस्य समर भंडारी और माले के राज्य सचिव इन्देश मैखुरी ने भी किसान आंदोलन में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। कांग्रेस नेता गुलजार अहमद ने उन्हें सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाला व्यक्ति बताया। वहीं आजाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष आजाद अली ने उनके भाईचारे और जनहित से जुड़े कार्यों को याद किया।
यूकेडी के केंद्रीय महामंत्री लताफत हुसैन, उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के संरक्षक बालेश बबानिया, किसान नेता दलजीत सिंह, एसएफआई राज्य अध्यक्ष नितिन मलेठा, सीटू राज्य सचिव लेखराज, एआईएलयू महामंत्री शम्भूप्रसाद ममगाई सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि कमरुद्दीन का निधन उनके परिवार और संगठन के साथ-साथ सामाजिक आंदोलनों के लिए भी बड़ी क्षति है।
पुत्र ने कहा- अधूरे सपनों को पूरा करना जिम्मेदारी
कामरेड कमरुद्दीन के पुत्र नफीस ने सभा में शामिल सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने अपना पूरा जीवन समाज के कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के लिए समर्पित किया। उनके विचार और संघर्ष परिवार के साथ-साथ समाज के लिए भी प्रेरणा बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद किसान-मजदूर एकता और संघर्ष से जुड़े नारे लगाए गए।
सभा में डॉ. एचपी यादव, अनंत आकाश, अजय शर्मा, एडवोकेट अलास्मुस्दीन सिद्दीकी, आरपी डोभाल, अशोक शर्मा, याकूब अली, जाहिद अंजुम, ताजवर सिंह रावत, विजय भट्ट, सुधा देवली, जगदीश राणा, गुमान सिंह, गयूर अहमद, शैलेन्द्र परमार, रंजन सोलंकी, इकराम, इस्लाम, प्रदीप कुमार, जानकी चौहान, अयाज खान, गजेन्द्र वर्मा, इन्देश नौटियाल, विजय पाह्वा, कुसुम नौडियाल, अभिषेक भंडारी, अनिल गोस्वामी, विनोद खंडूरी, मोनिका, सोहन सिंह रावत, चित्रा और एनएस पंवार सहित बड़ी संख्या में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
