नई दिल्ली/देहरादून। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) उत्तराखंड ने दिल्ली में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए (NTA) को निरस्त करने तथा पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर निकाले गए ऐतिहासिक संसद मार्च पर भाजपा की मोदी सरकार द्वारा किए गए “बर्बर लाठीचार्ज” की कड़े शब्दों में निंदा की है।
पार्टी ने कहा कि विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान मोदी सरकार के इशारे पर सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
सीपीएम केन्द्रीय कमेटी सदस्य राजेंद्र सिंह नेगी,पार्टी राज्य सचिव राजेन्द्र पुरोहित और देहरादून सचिव अनन्त आकाश ने एक संयुक्त बयान में कहा कि सरकार ने युवाओं की आवाज को कुचलने के लिए दमन का रास्ता अपनाया है। पार्टी ने कहा, “हर लाठीचार्ज, हर आंसू गैस का गोला, हर वेल्डेड बैरिकेड, हर सील मेट्रो स्टेशन भाजपा सरकार के डर की इबारत है। एक सरकार जो अपने युवाओं का सामना नहीं कर सकती, उनके सवालों का जवाब नहीं दे सकती, वह कायर सरकार है। उसने लोकतंत्र के बजाय दमन को चुना है”।
गौरतलब है कि पिछले कई हफ्तों से जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों और अन्य समूहों द्वारा नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। सीपीएम ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को नजरअंदाज किया और उन्हें जबरन धरना स्थल से हटाकर अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया। पार्टी ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया और कहा कि सरकार जब तक इन मांगों पर सहमत नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा।
सीपीएम ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह दमन का रास्ता छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाए और अक्षम शिक्षा मंत्री को हटाकर युवाओं की बात सुने।
