देहरादून। भारत-चीन युद्ध 1962 के वीर योद्धा और शौर्यचक्र विजेता 93 वर्षीय सुबेदार बागसिंह को दो माह बाद उनके अधिकारित मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हुई। सुबेदार ने बताया कि उनके मकान के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण उन्हें लंबे समय तक न्याय नहीं मिल पाया।
सुबेदार ने जिलाधिकारी से की सीधी शिकायत
सुबेदार बागसिंह ने बताया कि उन्होंने कई बार विधायक खजानदासजी, आपदा मंत्री गणेश जोशी, मुख्यमंत्री कार्यालय और पार्षदों से संपर्क किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उन्होंने जनता दरबार में जाकर जिलाधिकारी से सीधे शिकायत की और सभी प्रमाणपत्र पेश किए। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी को मौके का मुआयना करने के निर्देश दिए।
अतिवृष्टि ने मकान को किया पूरी तरह क्षतिग्रस्त
11 अगस्त 2025 को हुई अतिवृष्टि के कारण उनके दो मंजिला मकान में भारी क्षति हुई थी। लगभग एक महीने तक मुआवजे की प्रक्रिया लंबित रहने के बाद 15 अगस्त की रात मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गया। इससे सुबेदार और उनके परिवार के लिए रहने की कोई सुविधा नहीं बची।
सार्वजनिक विरोध और प्रशासनिक उदासीनता
बस्ती बचाओ आंदोलन के आंकड़ों के अनुसार, सुबेदार बागसिंह की स्थिति जैसी कई प्रभावितों को पिछले एक महीने से मदद नहीं मिल पाई है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता के कारण प्रभावित लोग लगातार दर-दर भटक रहे हैं।
सुबेदार बागसिंह का सैन्य योगदान
सुबेदार बागसिंह ने राजपूताना राइफल में उल्लेखनीय सेवा दी और शौर्यचक्र के बाद अशोक चक्र से भी सम्मानित किए गए। वे भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून में मुख्य प्रशिक्षक रहे और उनके नेतृत्व में सैकड़ों कैडेटों ने उच्च पद हासिल किए।
अन्य प्रभावित मकान
गांधी ग्राम बड़ी मस्जिद के पास भी दो मकान अतिवृष्टि में ध्वस्त हो चुके हैं। इस संबंध में 16 सितंबर 2025 को मेयर और जिलाधिकारी कार्यालय में लिखित सूचना दी गई।
इस घटनाक्रम से स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई और प्रभावितों के प्रति उदासीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
