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देहरादून में श्रम संहिताओं और एमएसपी की गारंटी को लेकर जोरदार विरोध, पीएम मोदी का फूंका पुतला

देहरादून। केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नई श्रम संहिताओं और किसानों को फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी न दिए जाने के विरोध में बुधवार को उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति और संयुक्त किसान मोर्चा ने देहरादून के गांधी पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर विरोध जताया।

सीटू, ऐटक, इंटक और उत्तराखंड किसान सभा से जुड़े संगठनों ने संयुक्त रूप से रैली निकाली। सीटू कार्यालय से निकला जुलूस नारेबाजी करता हुआ गांधी पार्क पहुंचा, जहां पहले से मौजूद अन्य संगठन भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने श्रम संहिताओं को “मजदूर विरोधी” बताते हुए इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की।

नेताओं ने नए कानूनों को बताया मजदूरों के अधिकारों पर हमला

जनसभा को संबोधित करते हुए सीटू के प्रांतीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी, प्रांतीय सचिव लेखराज, इंटक के महामंत्री पंकज क्षेत्रीय, जिलाध्यक्ष अनिल कुमार, ऐटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, उपाध्यक्ष समर भंडारी, किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सजवाण, महामंत्री गंगाधर नौटियाल सहित कई नेताओं ने केंद्र सरकार पर श्रमिकों के अधिकार खत्म करने का आरोप लगाया।

वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2020 में विपक्ष की अनुपस्थिति में 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर उनकी जगह 4 नई श्रम संहिताएं लाई गईं, जिन्हें 21 नवंबर 2025 से लागू कर दिया गया है। इन संहिताओं से हड़ताल, यूनियन बनाने और नौकरी सुरक्षा जैसे बुनियादी अधिकार प्रभावित होंगे।

नेताओं ने आरोप लगाया कि फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट के प्रावधान के कारण मजदूर एक वर्ष की सेवा पूरी ही नहीं कर पाएंगे, जिससे ग्रेच्युइटी का लाभ भी नहीं मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि यह कानून मालिक पक्ष को लाभ पहुंचाते हैं और मजदूरों को “गुलाम बनाने” का प्रयास हैं।

एमएसपी गारंटी पर भी उठी कड़ी आपत्ति

वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी देने के वादे से पीछे हटने का आरोप भी लगाया। कहा कि सरकार की इस नीति से किसानों में गहरी नाराजगी है और देशभर में विरोध तेज हो रहा है।

पुतला दहन और नारेबाजी के साथ प्रदर्शन संपन्न

चारों श्रम संहिताओं के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री का पुतला फूंका और लगातार नारेबाजी करते हुए संहिताओं को “काला कानून” बताया। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कानून वापस नहीं लिए तो राज्यभर में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

कई संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

इस मौके पर किसान नेता शिवप्रसाद देवली, सीटू उपाध्यक्ष भगवंत सिंह पयाल, राजेंद्र पुरोहित, सचिव अभिषेक भंडारी, महिला प्रतिनिधि प्रेमा, बैंक कर्मचारी यूनियन के एस.एस. रजवार, किरण यादव, सोनू कुमार, महेंद्र सिंह, उमेाश बोहरा, प्रभा देवी, शिवा दुबे, सुनीता चौहान समेत कई यूनियनों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी नेताओं ने पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं यूकेडी नेता को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा।