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विजय दिवस पर विशेष

देश की जनता की एकजुटता एवं समाजवादी सोवियत संघ की खुलकर मदद ने विश्व को नया राष्ट्र बांग्लादेश दिया :- अनन्त आकाश

आज बांग्लादेश की स्थापना हुई और विजय दिवस की 52 बर्ष पूरे हुऐ हैं । इसी दिन पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के समक्ष हथियार डाल दिये ,इसके साथ ही बाग्लादेश अलग राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर आया यह ऐतिहासिक क्षण था । जब भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को पूर्णतः आत्म समर्पण के लिये मजबूर किया था ।इस युद्ध में हमारे सैकड़ों की संख्या में सैनिक शहीद हुऐ तथा पाकिस्तान शासकों की क्रुरता के चलते दोनों देशों की जनता को असहनीय कष्ट झेलना पड़ा ।

भारत की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे हमारे देश की जनता की एकजुटता एवं तत्कालीन समाजवादी सोवियत संघ द्वारा खुलकर भारत का समर्थन रहा है ।जिसके चलते पाकिस्तान के बहाने अमेरिकी साम्राज्यवादी षढ़यन्त्र कामयाब नहीं हुऐ और उसे पीछे हटना पड़ा तथा मुंह की खानी पड़ी । अमेरिका को भारत की विजय तथा पाकिस्तान का विभाजन कतई पसन्द नहीं था ,इसलिए हरसम्भव उसनें पाकिस्तानी हुकमरानों की जमकर मदद की । भारत पूर्वी पाकिस्तान (अब बाग्लादेश) में दमनात्मक कार्यवाही की घोर विरोधी रहा इसलिए भारत की जनता ने सेना के मनोबल बनाने के लिए हरसम्भव सहायता की तथा तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गांघी के नेतृत्व में पाकिस्तान एवं अमेरिका को मुंहतोड़ जबाब दिया गया ।

जब देश में कोई मनमुटाव न हो तथा साम्प्रदायिक सौहार्द हो तो देश कोई भी चुनौती को स्वीकार कर सकता है । यही पीएम इन्दिरा गांधी के नेतृत्व में उस दौर में हुआ था । 1971 विजय के बाद आज हम वो मुकाम इसलिए हासिल नहीं कर पाये हैं क्योंकि हमारे हुकमरानों ने उतरोत्तर देश की जनता के साथ सभी मायनों में न्याय नहीं किया । बाजपेयीजी के समय कारगिल युध्द भी काफी विवादास्पद रहा है ,इस युद्ध में भी हमारे सैकड़ों सैनिक शहीद हुऐ । निरपेक्ष जनता का मानना है कि युद्ध के पीछे तत्कालीन बाजपेयी सरकार की मंशा देश में युद्धोन्माद पैदाकर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के माध्यम से बहुसंख्यक हिन्दु वोटों को बटोर कर पुनः सत्ता हासिल करना था । जिसमें वे सफल भी हुऐ ।।आज कमोबेश मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जो कारपेरेट एवं संघ परिवार द्वारा नियन्त्रित है । इससे भी आगे बढ़ गयी ,इस सरकार का एक सूत्रीय कार्यक्रम है ,जनता को हर हाल में बांट के एवं भटका के रखो ताकि उनका ध्यान असली मुद्दों पर न जाये ।इसीलिए कभी अयोध्या तो , कभी काशी , तो कभी मथुरा ,कभी हिन्दू तो कभी मुस्लिम तो कभी अगड़ा तो कभी पिछड़े का नारा देकर जनता को मुख्यधारा से काटा जा रहा है ।माना जा रहा है पुलवामा में जवानों की हत्या तथाकथित पाकिस्तान पर सर्जिकल हमला भी 2019 में मोदीजी की पुनः सत्ता वापसी का कारण बनी ।

साम्प्रदायिक विभाजन तथा जनता को दिग्भ्रमित संघ परिवार कारपोरेट ने मिलकर देश की अकूत सम्पत्ति लुटखसौट जारी है ,इस प्रकार मोदी सरकार एवं उनके आका ने देश न को केवल कमजोर करने पर आमादा हैं , बल्कि विश्व स्तर हमारे पर हमारे देश की छवि को धूमिल करने का ही कार्य किया । आज गलवान में भारत चीन सैनिकों की झड़प को जिस ढ़ंग से साम्प्रदायिक एवं विभाजकारी तत्व पेश कर रहे हैं ,और अमेरिका जिस तरह भारत चीन के सम्बन्धों को खराब करने के लिये हरेक हथकण्डों को अपना रहा है, मोदी सरकार उसके हाथ की कठपुतली बनने के लिये तैयार आमदा है ,यूक्रेन युद्ध व उसकी तबाही का उदाहरण हमारे सामने है किस तरह अमेरिकी साम्राज्यवाद ने रूस यूक्रेन में युद्ध करवाकर यूक्रेन के हालात बद बदतर कर डालेवहाँ की जनता उस देश के राष्ट्राध्यक्ष की गलतियों का खामियाजा भुग रही है जिसके सनक के पीछे अमेरिकी नेतृत्व में नाटो बैठा है ,अमेरिका ने इराक , अफगानिस्तान , सीरिया,लीबिया आदि देशों को किस तरह तबाह किया ? उदाहरण दुनिया के सामने है ।विजय दिवस की 52 पूर्ण होने पर हम सभी संकल्प लें , हमें धर्मनिरपेक्ष , जनतान्त्रिक एवं एक समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की ओर आगे बढ़ना है ,फूटपरस्त ताकतों को अलग थलग करना है ।

पुनः इस महायुद्ध में शहीद एवं बीरगति को प्राप्त सैनिकों एवं नागरिक समाज को शत् शत नमन ।
विश्व शान्ति जिन्दाबाद !अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
साम्प्रदायिक एव फूटपरस्त ताकतों का नाश हो !
दुनियाभर के मेहनतकशो एक हो ।