इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली से लेकर विदेशों तक में उत्तराखँड केचित्रकार कलाकार राजीव सेमवाल की कलाकृतियाँ चित्र धूम मचा रहे हैं।राजीव उत्तराखँड में जनपद रूद्रप्रयाग के पोला ग्राम निवासी इनके पिता स्व शिव प्रसाद सेमवाल भारतीय सेना में कार्यरत थे।और बेहतरीन चित्रकार थे।दिल्ली विश्वविधालय से बी काम की पढा़ई करने के बाद 2010 में राजीव समकालीन कला आन्दोलन से जुडे़,और अपनी चित्रकारी से पहचाने जाने लगे,राजीव की कला में प्रकृति का बहुत खूबसूरत चित्रण है।

पेड़,पौधे,फूल,तितलियाँ,राधा,कृष्ण,बाँसुरी,और लहलहाती फसलों का चित्रण एक अलग और अनोखा रूप कला को देता है।राजीव को इँन्डियन एकेडमी आफ फाईन आर्ट अमृतसहर के द्वारा 2011,2012,और 2018 में पुरूष्कृत किया जा चुका है।पिछले दिनों राजीव सेमवाल से जब हमारी मुलाकात हुई तो उन्होंने बताया उनकी चित्रकारी में काले और सफेद रँग का प्रयोग किया जाता है,और इन्हीं रँगों से उन्हें देश ,विदेशों में एक अलग पहचान मिली है।

कुछ दिन पूर्व राधा ,कृष्ण,की दिब्य अलौकिक चित्रकारी बनाने पर वृन्दावन में संम्मानित किया गया ,यह संम्मान उनको पदम श्री कृष्ण कन्हाई जी के कर कमलों द्वारा दिया गया।राजीव बताते हैं हमारा उत्तराखँड देवभूमि है कण कण में देवी देवताओं का वास है तो मानव बला इससे कैसे वँचित रह सकता है सिर्फ ब्यक्ति को अपनी कला का प्रदर्शन करना है,बाकी सब रास्ते खुद ब खुद खुलते जाते हैं साथ ही प्रदेश की सरकार को अपने कलाकारों की पहचान कर उनकी कला के प्रदर्शन हेतु मंच देना चाहिए साथ ही चित्रकारों की कलाओं को समय समय पर सराहकर पुरूष्कृत किया जाना चाहिए।



