देहरादून। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के दिवंगत महासचिव और वरिष्ठ नेता कॉमरेड सीताराम येचुरी की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर देहरादून नगर निगम टाउन हॉल में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से सीपीआई (एम) के कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समर्थक शामिल हुए। सीपीआई, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉमरेड राजेंद्र सिंह नेगी ने की, जबकि संचालन राज्य सचिव राजेंद्र पुरोहित ने किया। मुख्य वक्ता पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता कॉमरेड वृंदा करात रहीं। उन्होंने सीताराम येचुरी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

जनआंदोलनों में येचुरी के योगदान को किया याद
अपने संबोधन में वृंदा करात ने सीताराम येचुरी के जीवन, संघर्ष और देश के लोकतांत्रिक एवं सामाजिक आंदोलनों में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि येचुरी ने जीवनभर किसान-मजदूरों, वंचित वर्गों, दलितों, आदिवासियों और आम जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि येचुरी ने संसद से लेकर सड़क तक जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। राज्यसभा सांसद और पार्टी महासचिव के रूप में उन्होंने देश की धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक राजनीति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वृंदा करात ने कहा कि येचुरी का जीवन सादगी, त्याग और वैचारिक प्रतिबद्धता का उदाहरण था। उन्होंने पद और सत्ता को लक्ष्य बनाने के बजाय जनहित और वैचारिक संघर्ष को प्राथमिकता दी। वाम आंदोलन और देश की प्रगतिशील राजनीति में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।

सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ एकजुटता पर जोर
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर बोलते हुए वृंदा करात ने देश में बढ़ती सांप्रदायिक और विभाजनकारी राजनीति पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ परिवार हिंदुत्व के नाम पर अपना एजेंडा आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने इसके खिलाफ देशव्यापी स्तर पर लोकतांत्रिक और जनवादी ताकतों को एकजुट होने का आह्वान किया।
उन्होंने आजादी के आंदोलन में विभिन्न वर्गों के योगदान और बलिदान का उल्लेख करते हुए संघ परिवार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
मतदाता सूची से नाम हटाने का मुद्दा उठाया
वृंदा करात ने उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र की बुनियादी ताकत है और पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटना गंभीर विषय है। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर संघर्ष की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए जनवादी ताकतों की एकजुटता पहले से अधिक जरूरी है। उन्होंने देशभर में हिंदुत्व की राजनीति के खिलाफ बन रही एकता को और मजबूत करने का आह्वान किया।
कई नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि हुए शामिल
सभा में सीपीआई की राष्ट्रीय परिषद के पूर्व सदस्य कॉमरेड समर भंडारी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. एसएन सचान, कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र अग्गरवाल और अपर निदेशक शिक्षा उत्तराखंड शिवप्रसाद सेमवाल समेत कई वक्ताओं ने विचार रखे।
मंच पर राज्य सचिव मंडल के सदस्य कॉमरेड इंदु नौडियाल, भूपाल सिंह रावत, महेंद्र जखमोला, शिवप्रसाद देवली, लेखराज, नितिन मलेठा, माला गुरुंग, अनंत आकाश, सुरेंद्र सिंह सजवाण और दलजीत सिंह समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में भगवान सिंह राणा, सुरेंद्र रावत, राजेंद्र नेगी, सतकुमार, हिमांशु चौहान, मनमोहन सिंह, शंभूप्रसाद ममगाईं, विजय भट्ट, डॉ. रवि चोपड़ा, रंजन सोलंकी, प्रो. रंधावा, एसएस नेगी, समदर्शी बर्थवाल, शैलेंद्र परमार, अय्याज खान, डॉ. प्रेम सिंह दानू, हरिओम पाली, मोहन सिंह नेगी, कनिका, विप्लव, रविंद्र नौडियाल, नुरैशा और हरीश समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
सभा में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और सीताराम येचुरी के विचारों, संघर्ष तथा जनपक्षीय राजनीति की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
