देहरादून। मोहकमपुर से आशारोड़ी तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड और हाईवे चौड़ीकरण परियोजना के खिलाफ विरोध तेज होने लगा है। इस योजना के विरोध में विधानसभा के समक्ष आयोजित धरने को सीपीआई (एम), सीटू, डीवाईएफआई और बस्ती बचाओ आंदोलन ने समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से परियोजना से संबंधित अधिसूचना रद्द करने की मांग उठाई।
मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित धरने में वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-07 पर मोहकमपुर से आशारोड़ी के बीच किलोमीटर 0 से 12.7 तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि इस परियोजना के चलते सड़क किनारे बसी सैकड़ों गरीब परिवारों की बस्तियों पर संकट मंडरा रहा है।

सैकड़ों परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा
प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि हाईवे चौड़ीकरण की जद में आने से सैकड़ों परिवारों के मकान प्रभावित हो सकते हैं। इससे न केवल लोगों के सामने आवास का संकट खड़ा होगा, बल्कि उनकी आजीविका भी प्रभावित होने की संभावना है। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि विकास योजनाओं को लागू करते समय गरीब और जरूरतमंद परिवारों के हितों की अनदेखी न की जाए।
अधिसूचना रद्द होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
धरने में वक्ताओं ने कहा कि भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 7 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना को निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिसूचना रद्द होने तक शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही सरकार से प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और उनके हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की अपील की।
धरने के दौरान सीपीएम सचिव एवं बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनंत आकाश, सीटू के महामंत्री एवं डीएवी महाविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी लेखराज, उपाध्यक्ष भगवंत पयाल, सचिव अभिषेक भंडारी, डीवाईएफआई संयोजक विप्लव अनंत, नितिन बौंठियाल और रेहड़ी-पटरी यूनियन के महामंत्री मनीष कुमार सहित अन्य लोगों ने विचार रखे।


