देहरादून। लखवाड़-व्यासी जलविद्युत परियोजना में कार्यरत संविदा श्रमिकों की लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से श्रमिकों में आक्रोश बढ़ गया। सीआईटीयू से संबद्ध उत्तराखंड संविदा श्रमिक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में श्रमिकों ने अजाबपुर स्थित श्रम कार्यालय पहुंचकर अपर श्रम आयुक्त का घेराव किया। इस दौरान श्रमिकों ने श्रम कार्यालय में तालाबंदी कर जोरदार प्रदर्शन किया।
श्रमिकों का आरोप है कि उनकी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से श्रम विभाग को ज्ञापन देने के साथ ही वार्ता के माध्यम से समाधान की मांग की जा रही थी, लेकिन विभाग की ओर से मामले को लगातार टाला जाता रहा। औद्योगिक विवाद (आईआर) की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ने से श्रमिकों का गुस्सा बढ़ गया।
संघ के मुताबिक, निर्माणाधीन लखवाड़-व्यासी जलविद्युत परियोजना, ग्राम एवं पोस्ट लोहारी (कुन्ना), देहरादून में कार्यरत श्रमिकों की समस्याओं को लेकर 8 जून 2026 को श्रम विभाग को मांग पत्र सौंपा गया था। इसके बावजूद निर्धारित समय में वार्ता और समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी के विरोध में श्रमिकों ने गुरुवार को प्रदर्शन किया।
ये हैं श्रमिकों की प्रमुख मांगें
उत्तराखंड संविदा श्रमिक संघ ने टनल में काम करने वाले श्रमिकों को 20 प्रतिशत टनल भत्ता देने और पूर्व से कार्यरत श्रमिकों को भी इसका लाभ देने की मांग की है। इसके साथ ही मुख्य कंपनी एलएंडटी, उससे जुड़ी कंपनियों और उप ठेकेदारों के श्रमिकों पर स्थायी आदेश तत्काल लागू करने की मांग की गई।
संघ ने श्रमिकों को प्रत्येक माह की पहली तारीख तक वेतन पर्ची उपलब्ध कराने, नियमानुसार वार्षिक, स्थानीय और राष्ट्रीय अवकाश देने तथा अधिकतम सात तारीख तक वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग रखी है। उप ठेकेदारों के माध्यम से किए गए ओवरटाइम का नियमानुसार भुगतान करने की मांग भी शामिल है।
श्रमिकों ने परियोजना भत्ता, धूल भत्ता, रात्रि भत्ता और शीतकालीन भत्ता देने के साथ कार्यस्थलों पर शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र और वेतन पर्ची देने के साथ साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
संघ ने आकस्मिक अवकाश लेने वाले श्रमिकों को अवकाश के दौरान नोटिस देकर परेशान करने और अनावश्यक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। इसके अलावा पूर्व में किए गए 49 दिन के ग्रामीण हड़ताल के भुगतान, श्रमिकों के लिए आने-जाने की परिवहन सुविधा और एलएंडटी, स्टार एक्स सहित अन्य ठेकेदार कंपनियों द्वारा देय बोनस का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।
लेबर कैंप में नहीं रहने वाले श्रमिकों को आवास भत्ता देने, सभी श्रमिकों के बीओसीडब्ल्यू कार्ड बनवाने और कार्यस्थल के आसपास इसके लिए शिविर लगाने की मांग भी संघ ने रखी है।
मृत ऑपरेटर के परिवार और हटाए गए श्रमिकों का मुद्दा भी उठा
संघ ने ड्यूटी के दौरान मृत हुए एक ऑपरेटर के परिवार को कंपनी की ओर से किए गए आश्वासन के अनुसार रोजगार और अन्य लंबित लाभ देने की मांग की। वहीं, एपीएस माइंस और मां दुर्गा कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा हेल्पर सहित अन्य श्रमिकों को बिना पूर्व सूचना हटाए जाने का विरोध करते हुए संबंधित श्रमिकों को दोबारा काम पर रखने की मांग भी की गई।
संघ का कहना है कि श्रमिकों की समस्याओं को लेकर कई बार श्रम विभाग से संपर्क और पत्राचार किया गया, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसी वजह से उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
आईआर की तारीख तय होने के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान सहायक श्रम आयुक्त के माध्यम से औद्योगिक विवाद की प्रक्रिया के तहत आईआर की तारीख निर्धारित की गई। इसके बाद संघ ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि, संघ ने स्पष्ट किया कि तय प्रक्रिया के तहत श्रमिकों की मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा।
संघ ने श्रम विभाग से आईआर की प्रक्रिया को निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरा कर श्रमिकों की लंबित मांगों के समाधान की मांग की है।
प्रदर्शन में सीआईटीयू जिला महामंत्री लेखराज, जिला सचिव अभिषेक भंडारी, जिला सचिव हिमांशु चौहान, जिला उपाध्यक्ष दीपक शर्मा, राम सिंह भंडारी, कोषाध्यक्ष रविंद्र नौडियाल, दया किशन पाठक, जितेंद्र बिजलवान, प्रदीप चौहान, सतीश तोमर, विपिन रावत, बबलू प्रकाश, प्रदीप पुंडीर, रोहित चौहान, सुरेश रावत, आशीष पुंडीर, गोविंद राम, मनजीत चौहान, जयवीर तोमर, अशोक तोमर, प्रेम दत्त जोशी, रॉबिन कपूर, भारत सिंह तोमर, चेतराम शर्मा, राकेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रमिक मौजूद रहे।
