गोपेश्वर। हरेला पर्व के अवसर पर हमारु मुल्क हमारु क्षेत्र ट्रस्ट के सहयोग से अक्षत नाट्य संस्था द्वारा गोपेश्वर बस स्टेशन परिसर में पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नाटक ‘वसुंधरा’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। विजय बशिष्ट द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस नाटक ने प्रकृति संरक्षण का सशक्त संदेश देते हुए दर्शकों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम को लोगों ने खूब सराहा और कलाकारों के अभिनय की जमकर प्रशंसा की।
नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार मानव अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहा है। अवैध रूप से पेड़ों की कटाई, खनन, दिखावे के लिए बड़े-बड़े भवनों का निर्माण, सामाजिक आयोजनों में बढ़ती फिजूलखर्ची, शराब सेवन के बाद वाहन चलाना और नियमों की अनदेखी जैसी गतिविधियां किस तरह पर्यावरण और समाज के लिए खतरा बन रही हैं, इसे प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया गया।

नाटक में धरती मां (वसुंधरा) को सूत्रधार के रूप में प्रस्तुत कर प्रकृति की पीड़ा और उसकी चेतावनियों को संवेदनशील अंदाज में दर्शाया गया। यह भी दिखाया गया कि बार-बार चेतावनी मिलने के बावजूद जब इंसान प्रकृति का दोहन नहीं रोकता, तो उसे केदारनाथ जैसी भीषण आपदाओं का सामना करना पड़ता है।
कलाकारों के जीवंत और स्वाभाविक अभिनय ने दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा। कई दृश्यों में दर्शकों की तालियां गूंज उठीं, वहीं भावनात्मक प्रसंगों ने लोगों की आंखें भी नम कर दीं।
नाटक में रिया सकलानी, हरीश भारती, कुलदीप करासी, धीरज राणा, दर्शन बर्त्वाल, दीवान सिंह नेगी, अमीषा रावत, सुनिल नाथन बिष्ट, परवीन कुमार, विजय बशिष्ट, दिव्यांशु कुंवर, आयुष रावत, अमन नेगी और प्रिया राणा सहित कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का संचालन सुनिल नाथन बिष्ट ने किया। मंच सज्जा की जिम्मेदारी मंजू बिष्ट ने निभाई, जबकि वेशभूषा एवं प्रचार-प्रसार का कार्य कुसुम बशिष्ट ने संभाला। आयोजन को सफल बनाने में कमल डिमरी, ओमप्रकाश पुरोहित, आयुष बशिष्ट और आदर्श चंद्रप्रभा करासी सहित अन्य सहयोगियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम के दौरान झूमेलो लोकनृत्य और लोकगीतों की आकर्षक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिनमें मिलन किट्टी ग्रुप, सुभाष नगर किट्टी ग्रुप और हर-हर महादेव कीर्तन मंडली ने सहभागिता की।
इस अवसर पर डीएफओ बद्रीनाथ-केदारनाथ वन प्रभाग, लोक गायिका पम्मी नवल, निर्वाचन अधिकारी धीरेन्द्र चंद्र सती तथा समाजसेवी शांति प्रसाद भट्ट विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आयोजन के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया।
