देहरादून। राजधानी देहरादून के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र इंदिरा मार्केट के पुनर्विकास कार्य में लगातार हो रही देरी को लेकर व्यापारियों और प्रभावित परिवारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रभावितों का आरोप है कि आधुनिक बाजार का सपना दिखाकर सैकड़ों व्यापारियों और उनके परिवारों को आर्थिक संकट के दौर से गुजरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
घंटाघर के समीप राजपुर रोड स्थित इंदिरा मार्केट के पुनर्विकास की योजना वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। बाद में वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने करीब 242 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना को गति देने की घोषणा की थी। हालांकि, प्रभावितों का दावा है कि समय के साथ परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 450 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, लेकिन निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है।
व्यापारियों का कहना है कि तीन वर्षों के दौरान निर्माण स्थल पर बेहद सीमित काम हुआ है। उनका आरोप है कि मौके पर पर्याप्त श्रमिक नहीं लगाए गए, जिसके कारण परियोजना लगातार विलंब का शिकार हो रही है। वहीं, संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

पुनर्विकास परियोजना से जुड़े करीब 600 व्यापारियों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। अस्थायी बाजारों में स्थानांतरित किए गए दुकानदारों का कहना है कि उनके कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। साथ ही, प्रस्तावित नई दुकानों के आकार और आवंटन प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
प्रभावित व्यापारियों का आरोप है कि परियोजना के मूल स्वरूप में बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका कहना है कि जिस योजना का उद्देश्य व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था, वही अब उनके लिए चिंता का कारण बनती जा रही है।
सोमवार को प्रभावित पक्ष की ओर से एमडीडीए सचिव और निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता भी हुई, लेकिन बैठक से कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद प्रभावितों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
बैठक में प्रभावितों की ओर से अनंत आकाश, दिनेश सती, अशोक सचदेवा, धर्मेंद्र कुमार, मुमताज, इमरान, मेहरबान और मनमोहन सहित अन्य लोग मौजूद रहे। व्यापारियों ने प्रशासन से परियोजना की प्रगति, समयसीमा और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।
