देहरादून– बिन्दाल-रिस्पना नदी किनारे बसी मलिन बस्तियों के लोगों का हालात दयनीय हो गया है। पिछले वर्ष अगस्त-सितम्बर में आई भीषण बाढ़ से जहाँ इन बस्तियों को भारी नुकसान हुआ, वहीं टूटे पुश्तों का अब तक पुनर्निर्माण न होने से नया बरसात का मौसम नई मुसीबत बनकर सामने आ रहा है।
आज जिलाधिकारी कार्यालय में बस्ती बचाओ आन्दोलन के प्रतिनिधिमण्डल ने मान
जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमण्डल में विप्लव अनन्त, नुरैशा, निशा रतूडी, सुनीता यादव, रंजीत, सबनुर आदि शामिल थे। जिलाधिकारी की ओर से उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी ने ज्ञापन लिया और प्रतिनिधिमण्डल को आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।
क्यों उठाना पड़ा मुद्दा?
· बाढ़ का खतरा: 11 अगस्त 2025 एवं 15-16 सितम्बर 2025 की अतिवृष्टि से बिन्दाल नदी के किनारे के पुश्ते टूट गए, किन्तु अब तक पुनर्निर्माण नहीं हुआ।
· नदियाँ बनीं नाला: नगर निगम सहित शहर का अनुपचारित सीवेज, ठोस कचरा, प्लास्टिक व औद्योगिक कचरा सीधे बिन्दाल-रिस्पना नदियों में फेंका जा रहा है। नदियाँ कीचड़ और कूड़े से पट गई हैं।
· बुनियादी सुविधाओं का अभाव: नदी किनारे की कच्ची बस्तियों में न तो पथप्रकाश है, न नियमित सफाई। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में है।
· पीड़ितों को नहीं मिली राहत: बाढ़ के करीब नौ माह बाद भी प्रभावित परिवारों को कोई अनुदान या राहत राशि नहीं दी गई।
पाँच सूत्री माँगें:
1. तटबन्ध निर्माण: बिन्दाल व रिस्पना नदी के टूटे/जर्जर पुश्तों का RCC पुनर्निर्माण तथा जहाँ तटबन्ध नहीं, वहाँ नया निर्माण।
2. नदी सफाई एवं प्रदूषण पर रोक: कीचड़, कूड़ा-प्लास्टिक हटाया जाए; बिना उपचारित सीवेज न डाला जाए; कचरा डालने पर पूर्ण प्रतिबन्ध, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई।
3. पथप्रकाश: नदी किनारे की बस्तियों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था।
4. सफाई एवं स्वास्थ्य सुरक्षा: नियमित सफाई, मच्छर एवं गंदगी जनित रोगों (मलेरिया, डेंगू, डायरिया) की रोकथाम हेतु नियमित दवा छिड़काव।
5. बाढ़ पीड़ितों को राहत: अगस्त-सितम्बर 2025 की बाढ़ से पीड़ित सभी परिवारों को शासन द्वारा घोषित अनुदान तुरन्त दिया जाए।
प्रतिनिधियों ने बताया कि पूर्व में नगर निगम माननीय मेयर को भी यह ज्ञापन दे दिया गया था, किन्तु अब तक ठोस कार्यवाही नहीं हुई। अब उन्होंने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की अपील की है।
उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी ने आश्वासन दिया कि माँगों पर गम्भीरता से विचार करते हुए शीघ्र आवश्यक आदेश जारी किए जाएंगे। हालाँकि प्रशासन की ओर से तत्काल किसी समय-सीमा का ऐलान नहीं किया गया।
बस्ती बचाओ आन्दोलन का कहना है कि यदि माँगें शीघ्र पूरी नहीं हुईं तो वे आन्दोलन तेज करने को मजबूर होंगे।
