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सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस ने उत्तराखंड की नई न्यूनतम वेतन अधिसूचना को बताया छलावा

देहरादून। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) की उत्तराखंड राज्य कमेटी ने राज्य सरकार द्वारा जारी नई न्यूनतम वेतन अधिसूचना का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इसे मजदूरों के साथ छलावा बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया और मांग की कि राज्य में न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये से कम तय नहीं किया जाना चाहिए।

सीटू नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार ने 29 अप्रैल 2026 को इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए नई न्यूनतम वेतन दरें अधिसूचित की हैं, जिनमें अकुशल श्रमिकों के लिए 13,800 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों के लिए 15,000 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,900 रुपये मासिक वेतन निर्धारित किया गया है। संगठन का आरोप है कि यह फैसला पूरी तरह एकतरफा है और इसमें न तो वैज्ञानिक आधार अपनाया गया और न ही वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया।

संगठन के अनुसार, सरकार ने दावा किया है कि यह वेतन निर्धारण त्रिपक्षीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है, लेकिन किसी भी केंद्रीय ट्रेड यूनियन या आंदोलित श्रमिक संगठनों से कोई वास्तविक परामर्श नहीं किया गया। सीटू ने कहा कि समिति का गठन भी हाल ही में किया गया और उसमें शामिल श्रमिक प्रतिनिधियों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

सीटू ने आरोप लगाया कि राज्य गठन के बाद से अब तक ‘राज्य न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड’ का गठन नहीं किया गया, जबकि न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत यह अनिवार्य है। संगठन का कहना है कि पिछले 25 वर्षों में न्यूनतम वेतन में नियमित संशोधन नहीं होने से श्रमिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

संगठन ने यह भी कहा कि महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत को ध्यान में रखे बिना बेहद कम वेतन तय किया गया है। सीटू ने सर्वोच्च न्यायालय के ‘रैप्टाकोस फैसले’ और भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से न्यूनतम वेतन तय करने की मांग उठाई।

सीटू ने राज्य सरकार से तत्काल राज्य न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड के गठन, वैधानिक समिति बनाने और सभी श्रमिकों के लिए एक समान न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग की है। साथ ही संगठन ने मजदूरों से इस अधिसूचना का विरोध करने का आह्वान भी किया है।