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12 फरवरी 2026 ,सोमवार 10:30 बजे गांधी पार्क चलो 

राज्य सचिवालय पर विशाल प्रदर्शन

” जनविरोधी रिस्पना – बिन्दाल एलिवेटेड रोड़ निरस्त करने तथा बस्तियों के मालिकाना हक की मुख्य मांग पर मुख्य सचिव को 1 लाख हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन दिया जायेगा ”

देहरादून। बस्ती बचाओ आंदोलन के डेढ़ लाख हस्ताक्षरों के बाद 9 अक्टूबर 025 को मुख्यसचिव उत्तराखण्ङ की अध्यक्षता वाली बैठक ने बस्तियों के मालिकाना हक का फैसला लिया तथा आन्दोलन ने मांग की थी कि बिना भेदभाव किये सभी बस्तियों को मालिकाना हक ‌दिया जाये किन्तु मुख्यसचिव के आदेशों के बावजूद भी जिलाप्रशासन एवं नगरनिगम द्वारा मालिकाना हक का मामला ठण्डे बस्ते में डाल दिया है ताकि पूर्व की भांति भाजपा सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव में मालिकाना हक के नाम पर बस्तियों से वोट बटोर सके तथा चुनाव जितने के बाद दिल्ली,विहार ,यूपी ,हरियाणा आदि राज्यों की तरह ही बस्तियों को उजाड़ने का कार्य कर सके ,जैसे कि पिछले निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री धामीजी की घोषणा के बावजूद भी देहरादून अनेकों स्थान पर बस्तियों को उजाडा़ गया तथा जनता की असहमति व विरोध के बावजूद भी एलिबेटेड को मंजूरी देकर हजारों परिवारों को बेघरबार करने का फैसला लिया गया वहीं नगरनिगम देहरादून द्वारा अकेले बिन्दाल क्षेत्र में पड़ने वाले 872 घरों तोड़ने के लिऐ चुना गया ।

आज अकेले देहरादून नगरनिगम की 60 प्रतिशत आबादी इन्ही बस्तियों में रह रही है जहाँ न केवल देहरादून बल्कि हमारे राज्य का मेहनतकश वर्ग चाहे वह चालक,राजमित्री हो याफिर द्याडी़ मजदूर या फिर बिजली ,,पानी कार्य करने वाले हो इन्ही बस्तियों से आते हैं ,घरों काम करने वाली कामकाजी महिलाएं तथा सब्जी ,रेहड़ी ,पटरी व्यवसाय जिनके बना जीवन संचालित होना सम्भव नहीं है ।आबादी का यह बड़ा हिस्सा बड़े कष्टों जीवन यापन करने के बावजूद अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा है । बस्ती बचाओ आन्दोलन द्वारा माननीय हाईकोर्ट नैनीताल में एलिवेटेड रोड़ तथा नगरनिगम/ एमडीडीए द्वारा 872 मकानों को तोड़ने के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है ,जनसुनवाई में प्रभावितों के विरोध के बावजूद जिलाधिकारी देहरादून की ओर एलिवेटेड रोड़ भूमि अधिग्रहण हेतु समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है,जिसमें बताया गया है कि 2800 प्रभावितों में से मात्र 372 कानून सम्मत मुआवजे एवं पुर्नवास के हकदार हैं जो कि अन्य प्रभावितों के साथ भारी अन्याय है ,जबकि कानूनन वे सभी प्रभावित बाजार भाव से मुआवजे तथा समुचित पुर्नवास तथा सभी सुविधाओं के हकदार हैं,एलिवेटेड रोड़ पर नौकरशाही बिना पार्षदों की सलाह लिये मनमाना फैसला लिया जा रहा है ।उत्तराखण्ड में भूमि अधिग्रहण के दौरान कब्जाधारियों (Occupants/Possessors) के अधिकारों के संबंध में ‘भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ (RFCTLARR Act, 2013) लागू होता है। इसके साथ ही, राज्य सरकार की अपनी पुनर्वास नीतियां भी हैं।

मुख्य कानूनी प्रावधान और कब्जाधारियों के अधिकार:
पात्रता (Eligibility): कानून के तहत, केवल भूमि के मालिक (Title holder) ही नहीं, बल्कि तीन साल या उससे अधिक समय से उस भूमि पर निर्भर या कब्जा जमाए हुए परिवार (जिनमें खेतिहर मजदूर, किराएदार, या बटाईदार शामिल हैं) भी ‘प्रभावित परिवार’ की श्रेणी में आते हैं , यदि सरकारी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहित की जाती है, सभी कब्जाधारियों को भी पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन (R&R) का लाभ मिल सकता है, यदि वे साबित कर सकें कि वे वर्षों से उस स्थान पर बसे हुए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, उन्हें हटाया जा सकता है। हालाँकि, रिहायशी मकानों पर तत्काल कार्रवाई से राहत मिल सकती है।
राज्य सचिवालय पर आयोजित प्रदर्शन के माध्यम से निम्नलिखित मांगों को प्रमुखता से उठाया जायेगा :-
(1) जनविरोधी एलिवेटेड रोड़ परियोजना निरस्त करो ।
(2) सभी बस्तीवासियों को मालिकाना हक दो ।
(3) छूटे हुऐ आपदा पीड़ितों को समुचित सहायता दो ,आगामी बर्षात से पूर्व रिस्पना बिन्दाल के दोनों तरफ बाढ से सुरक्षा की व्यवस्था करो ।
12 फरवरी सचिवालय प्रदर्शन की व्यापक तैयारी चल रही है ।