Breaking News

स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता को लूटना बन्द करो, मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजा 

देहरादून। मार्क्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी ने स्मार्ट मीटर एवं बिजली बोर्ड के नीजिकरण की निन्दा करते हुऐ बिजली को अडाणी ,अम्बानी को सौपनें की कड़े शब्दों में निन्दा की तथा कहा है कि जबसे स्मार्ट मीटर लगें तबसे जनता से मनमानी बिजली बिल बसूली की जा रही है जिनके पुराने मीटर हैं उनसे उपयोग के विपरीत बिल‌ बसूला जा रहा है ,जनता आयेदिन शिकायत कर रही है सरकार व बिजली विभाग सुन नहीं रहा है ।

इस सन्दर्भ में पार्टी की बैठक में डबल इन्जन सरकार एक के बाद एक सरकारी सम्पतियों को बेचने का फैसला ले रही है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा ।पार्टी देहरादून जिला कमेटी बैठक में सरकार से मांग की गई तत्काल स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाये तथा बिजली बिलों में बढ़ोत्तरी तथा मनमानी बसूली पर अविलम्ब अकुंश लगे ।

बैठक में राज्य सचिव राजेन्द्र पुरोहित,जिलासचिव शिवप्रसाद देवली, देहरादून सचिव अनन्त आकाश, सीआईटीयू जिलामहामन्त्री लेखराज , , कमरूद्दीन माला गुरूंग, , भगवन्त पयाल, शम्भूममगाई , सुधा देवली ,रविन्द्र नौडियाल ,अर्जुन रावत आदि ने विचार व्यक्त किये ,अध्यक्षता कामरेड कमरूद्दीन ने की ।

सेवामें
मुख्य सचिव महोदय
उत्तराखण्ड शासन
देहरादून ।
बिषय :- बिजली बोर्ड के नीजिकरण एवं स्मार्ट मीटर से गरीब ,किसानों ,मजदूरों एवं मध्यवर्गीय परिवारों को होने वाले नुकसान तथा बिजली बिल की मनमानी बसूली पर रोक के सन्दर्भ में ज्ञापन प्रेषण ।_
महोदय,
सीपीआई (एम)11 मार्च। 025 राज्यव्यापी विद्युत मुख्यालयों पर प्रदर्शन /धरनों के माध्यम से आपसे उपरोक्त बिषय के सन्दर्भ में उत्तराखण्ड की सरकार द्वारा बिजली बोर्ड के नीजिकरण तथा स्मार्ट मीटर लगाने का पुरजोर विरोध किया था तथा इसे सरकार का जनविरोधी फैसला मानती है तथा चोर दरबाजे से बिजली का सम्पूर्ण तरह से नीजिकरण का फैसला माना था तथा कहा था कि निजीकरण का नुकसान राज्य की गरीब,किसान तथा मध्यवर्गीय परिवारों को होगा, यही नहीं तथाकथित स्मार्ट मीटर से लगवाने पर सरकार द्वारा बड़े – बड़े दावे किये जा रहे थे तथा दावा किया जा रहा था उपभोक्ताओं को सुविधा होगी तथा बिजली के बिल भी सही आयेंगे सब्जबाग साबित हुआ है । आज बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं से कई गुना बिल बसूल रहा है तथा फालतू खर्चे का बोझ भी जनता पर डाला जा रहा है ।
महोदय, एक अनुमान के अनुसार इन कम्पनियों द्वारा स्मार्ट मीटर की कीमत 7500-10500 रूपये तय की गई है तथा जिसकी कीमत भी अन्तत: जनता को ही चुकानी होगी, इस प्रकार मंहगी बिजली तथा जोर जबरदस्ती थोपा गया स्मार्ट मीटर बिना सहमति के कानूनी मीटर बन्द किया जाना स्वाभाविक प्रक्रिया है ।
महोदय, सरकार को ज्ञात हो कि कोरपेरेटजगत को लाभ पहुंचाने के लिऐ बिजली के निजीकरण के लिऐ पांच बार लोकसभा में बिजली बिल बहुमत होने बावजूद भी पारित नहीं पाया, इससे पहले भी बाजपेई सरकार 2003 में ऐसा कर चुकी है ।
महोदय, आज चोर दरबाजे से बिजली के निजीकरण जो कार्य किया वह गैर संवैधानिक है । इससे पहले भाजपा की महाराष्ट्र ,उड़ीसा तथा वर्तमान दिल्ली व कांग्रेस की हिमाचल सरकारें चोर दरबाजे से निजीकरण कर अपने कोरपेरेट आकाओं की सेवा कर प्रयास चुकी है, जिसका जमकर विरोध हो रहा है ।
महोदय बिदित हो कि भारत सरकार ने बिजली सप्लाई एक्ट 1948 बनाया था जिसके तहत बिजली को गांवों ,शहरों, उद्योगों व खेती बाड़ी विकास हेतु बिजली आपूर्ति करना था ।आज 80 प्रतिशत गांवों में बिजली आपूर्ति से खाद्यान्न में भारी बृध्दि हुई जिसके तहत 5 किलो मुफ्त का अनाज देकर आपकी सरकार वोट बटोरने की राजनीति कर रही है, जबकि केरल की वामपंथी सरकार बिना राजनीति किये सभी गरीबों एवं जरूरतमन्दों को खाद्य पदार्थों सहित 25 आईटम मुफ्त दे रही है आज केरल देश का गरीबी मुक्त प्रदेश बन गया तथा अपनी राज्य की जनता सस्ती बिजली दे रही है ।
महोदय, आपके सरकार के तमाम फैसले यह बताने के लिऐ काफी हैं कि बिजली क्षेत्र स्वत: ही प्राइवेट हाथों में चले जाये और बिजली बोर्ड खत्म हो जाये परिणामस्वरूप हमारे राज्य सहित लाखों कर्मचारियों की नौकरी चली जायेगी, बिजली विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन पर प्रश्नचिन्ह लग जायेगा । स्मार्ट मीटर लगाने व बिजली विभाग के निजीकरण से बिजली कर्मचारियों और पेन्शन पर बिनाशकारी प्रभाव पड़ेगा, नये संविदा कर्मचारियों से कम मानदेय में ज्यादा काम लिया जायेगा तथा स्थाई रोजगार समाप्त होगा तथा ब बिपिएल परिवारों, भूतपूर्व सैनिकों, किसानी, लघु उद्योगों के क्षेत्र में लगे कर्मचारियों को बिजली में छूटों में कटौती होगी ।
भवदीय

(अनन्त आकाश)
सचिव देहरादून